1 अप्रैल 2027 से लागू होगी नई व्यवस्था; 1,000 रुपये या उससे अधिक के संदिग्ध लेनदेन पर कार्रवाई, खाताधारक को सफाई के लिए मिलेंगे 20 दिन।
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। साइबर ठगी के जरिए अर्जित धनराशि के प्रवाह पर अंकुश लगाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को प्रत्येक खाताधारक की वित्तीय प्रोफाइल तैयार कर उसके अनुरूप लेनदेन की निगरानी करने का प्रस्ताव दिया है। अब सामान्य गतिविधियों या घोषित वित्तीय प्रोफाइल से अलग संदिग्ध लेनदेन मिलने पर बैंक संबंधित राशि या खाते के लेनदेन पर अस्थायी रोक लगा सकेंगे।
1,000 रुपये से अधिक की संदिग्ध रकम भी जांच के दायरे में
प्रस्तावित नियमों के तहत बैंक की निगरानी प्रणाली यदि किसी लेनदेन को संदिग्ध मनी म्यूल गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम के रूप में चिन्हित करती है, तो 1,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर भी कार्रवाई की जा सकती है। खाताधारक के सामान्य लेनदेन से बहुत अलग गतिविधि या उसकी घोषित वित्तीय प्रोफाइल के विपरीत लेनदेन भी संदेह के दायरे में आएंगे।
संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए बैंक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर सकेंगे।
खाताधारक को सफाई देने का मिलेगा अवसर
नई व्यवस्था में बैंक को संदिग्ध लेनदेन या खाते पर अस्थायी रोक लगाने का अधिकार होगा, लेकिन खाताधारक को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
- बैंक को रोक लगाने का कारण और उसे हटाने की प्रक्रिया बतानी होगी।
- खाताधारक को जवाब देने के लिए 20 दिन का समय मिलेगा।
- जवाब मिलने के बाद बैंक को जांच कर 30 दिन के भीतर निर्णय लेना होगा।
- संदेह का आधार नहीं मिलने पर रोक हटानी होगी।
यदि संदेह बरकरार रहता है, तो मामला राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम (CFCFRMS) को भेजा जा सकेगा।
अधिकतम 60 दिन तक रह सकती है रोक
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, बैंक द्वारा मामला जांच एजेंसी या पुलिस को भेजे जाने के बाद 30 दिन के भीतर निर्णय लिया जाना होगा। यदि इस अवधि में कोई वैधानिक निर्देश प्राप्त नहीं होता है, तो बैंक को 31वें दिन रोक हटानी होगी। इस तरह अस्थायी रोक की अधिकतम अवधि 60 दिन हो सकती है।
1 अप्रैल 2027 से अनिवार्य होंगे नियम
आरबीआई के प्रस्तावित नए नियम 1 अप्रैल 2027 से अनिवार्य रूप से लागू होंगे। हालांकि, बैंक चाहें तो इन्हें पहले भी लागू कर सकेंगे। प्रत्येक बैंक को शिकायतों के निपटारे के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने होंगे और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मामलों का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य साइबर ठगी की रकम के प्रवाह को समय रहते रोकना और बैंकिंग प्रणाली में संदिग्ध खातों की पहचान को अधिक प्रभावी बनाना है।
