अपनी चार साल की मासूम के लिए मौत से भी लड़ गया पिता साहस की हो रही प्रशंसा।
धमतरी, छत्तीसगढ़। पिता का प्यार और साहस कितना अद्भुत हो सकता है, इसकी मिसाल छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में देखने को मिली। सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र में अपनी चार वर्षीय बेटी सुहानी मरकाम को तेंदुए के हमले से बचाने के लिए पिता सुरेश मरकाम खुद खूंखार वन्यजीव से भिड़ गए। करीब छह से आठ मिनट तक चले इस संघर्ष में पिता ने अपनी जान की परवाह किए बिना बेटी को बचाने की पूरी कोशिश की।
मासूम बेटी पर तेंदुए का हमला, ढाल बनकर सामने आए पिता
जानकारी के अनुसार, सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से तेंदुए के हमलों की घटनाएं सामने आ रही थीं। इसी दौरान शुक्रवार को तेंदुए ने चार वर्षीय सुहानी मरकाम पर हमला कर दिया। बेटी को खतरे में देखकर उसके पिता सुरेश मरकाम ने हिम्मत नहीं हारी और तेंदुए का सामना करने लगे।
करीब छह से आठ मिनट तक पिता और तेंदुए के बीच संघर्ष चलता रहा। यह पल किसी भी परिवार के लिए भयावह हो सकता था, लेकिन सुरेश मरकाम अपनी मासूम बेटी को बचाने के लिए डटे रहे।
ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता, जाल डालकर पकड़ा तेंदुआ
संघर्ष और शोरगुल सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और रस्सियों की मदद से तेंदुए को घेरने का प्रयास किया। इसके बाद जाल फेंककर तेंदुए को पकड़ लिया गया और उसे वन विभाग के हवाले कर दिया गया।
तेंदुए के हमले में एक ग्रामीण की मौत
इस घटना से पहले तेंदुए के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए एक ग्रामीण की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। लगातार हमलों की घटनाओं ने क्षेत्र के ग्रामीणों में चिंता और भय का माहौल पैदा कर दिया है।
वन विभाग करा रहा तेंदुए की जांच
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के अनुसार, तेंदुए को प्राथमिक उपचार देने के बाद जंगल सफारी भेजा गया है। विशेषज्ञ चिकित्सक उसकी जांच और निगरानी कर रहे हैं। तेंदुए के बदले हुए व्यवहार को देखते हुए रेबीज सहित अन्य संभावित कारणों की भी जांच की जाएगी।
एक पिता का साहस, जो हमेशा याद रहेगा
यह घटना एक बार फिर बताती है कि अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए माता-पिता किस हद तक जा सकते हैं। चार साल की मासूम बेटी के लिए तेंदुए से भिड़ जाने वाले सुरेश मरकाम का साहस लोगों के दिलों को छू लेने वाला है।
एक पिता अपनी बेटी के लिए ढाल बन गया—जहां एक ओर मौत का खतरा था, वहीं दूसरी ओर अपने बच्चे को बचाने का अटूट संकल्प।
