जनवरी 2027 होगी पात्रता तिथि, वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने और विवरण दुरुस्त कराने की प्रक्रिया पर रहेगी नजर
नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद और कानूनी चुनौती के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष सारांश पुनरीक्षण (SSR) की घोषणा की है। इस प्रक्रिया के तहत 1 जनवरी 2027 को पात्रता तिथि निर्धारित किया गया है।
चुनाव आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल SIR प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में मतदाता सूची के आगामी पुनरीक्षण पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं।
🔴 छत्तीसगढ़ समेत इन 17 राज्यों में होगा पुनरीक्षण
चुनाव आयोग के नोटिस के अनुसार, विशेष सारांश पुनरीक्षण के दायरे में निम्नलिखित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं—
- अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
- असम
- बिहार
- छत्तीसगढ़
- गोवा
- गुजरात
- केरल
- लक्षद्वीप
- मध्य प्रदेश
- मणिपुर
- पुडुचेरी
- पंजाब
- राजस्थान
- तमिलनाडु
- उत्तर प्रदेश
- उत्तराखंड
- पश्चिम बंगाल
यह पुनरीक्षण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत किया जाएगा। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।
🔴 SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। याचिका में पुनरीक्षण की वैधता को चुनौती देने के साथ-साथ मतदाता सूची से हटाए गए नामों का विवरण सार्वजनिक करने, मनमाने ढंग से नाम हटाने के खिलाफ सुरक्षा उपाय लागू करने और पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के न्यायिक ऑडिट की मांग भी उठाई है। साथ ही, मामले पर अंतिम निर्णय आने तक SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है।
🔴 विपक्ष की याचिका पर चुनाव आयोग को नोटिस
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं द्वारा SIR प्रक्रिया के खिलाफ उठाए गए कदमों के बाद दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग और संबंधित चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया है। इस कानूनी चुनौती में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया है।
हालांकि, अदालत में याचिका दायर होना या नोटिस जारी होना अपने आप में SIR प्रक्रिया को अवैध घोषित किए जाने के समान नहीं है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
🔴 फिलहाल इन राज्यों में SSR का कार्यक्रम घोषित
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया जारी है या हाल ही में पूरी हुई है, वहां विशेष सारांश पुनरीक्षण का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
ऐसे में मतदाताओं के लिए जरूरी है कि वे अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच करते रहें तथा आयोग की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखें। पात्रता तिथि 1 जनवरी 2027 निर्धारित होने के साथ ही मतदाता सूची को अद्यतन करने की आगामी प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
📌 मतदाताओं के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
मतदाता सूची में नाम होना मतदान के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए पुनरीक्षण के दौरान पात्र नागरिकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका नाम सूची में दर्ज हो और व्यक्तिगत विवरण सही हों। नाम जोड़ने, सुधार कराने या किसी अन्य बदलाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम और निर्देशों का पालन करना चाहिए।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि 17 राज्यों में SSR की प्रक्रिया किस समय-सारणी के अनुसार आगे बढ़ती है और SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी चुनौती पर आगे क्या रुख सामने आता है।
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