दूल्हा बनकर पति ने दी पत्नी को अंतिम विदाई, 42 साल के साथ के बाद दुल्हन की तरह सजी अमिता की अंतिम यात्रा ने हर आंख नम कर दी
बीकानेर। प्यार, समर्पण और वैवाहिक रिश्ते की गहराई को बयां करने वाला एक भावुक दृश्य बीकानेर में सामने आया। 42 साल तक जीवनसंगिनी के रूप में साथ निभाने वाली पत्नी के निधन के बाद पति ने उन्हें उसी सम्मान और प्रेम के साथ अंतिम विदाई देने का फैसला किया, जिस तरह कभी उन्हें दुल्हन बनाकर अपने घर लाए थे।
गंगाशहर रोड स्थित बाफना स्कूल के पास रहने वाले सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) के सेवानिवृत्त सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद जोशी की पत्नी अमिता जोशी (63) का गुरुवार रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया।
पत्नी के निधन के बाद गम में डूबे राजेन्द्र जोशी ने तय किया कि अमिता को सुहागन के रूप में ही अंतिम विदाई दी जाएगी। शुक्रवार को परिजनों ने अमिता को लाल दुल्हन के जोड़े और आभूषणों से सजाया। वहीं, 65 वर्षीय राजेन्द्र प्रसाद जोशी खुद दूल्हे के रूप में तैयार हुए और पत्नी की अंतिम यात्रा में उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
बैंड-बाजे के साथ निकली अंतिम यात्रा, शादी की धुनों से गूंजा रास्ता
अमिता की अंतिम यात्रा में बैंड-बाजा आगे चल रहा था और शादी की पारंपरिक धुनें बज रही थीं। दूसरी ओर परिजन और परिचित रामनाम संकीर्तन करते हुए पीछे चल रहे थे। दृश्य ऐसा था मानो वर्षों पहले शुरू हुआ विवाह का सफर अब अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा हो।
मोक्षधाम पहुंचने के बाद लंबे समय से खुद को संभाल रहे राजेन्द्र जोशी की भावनाएं आखिरकार छलक पड़ीं। वह पत्नी को अंतिम विदाई देते हुए फूट-फूटकर रो पड़े। उन्हें देखकर वहां मौजूद रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों की आंखें भी नम हो गईं।
18 फरवरी 1984 को शुरू हुआ था साथ, 42 साल बाद भी कायम रहा समर्पण
राजेन्द्र प्रसाद जोशी और अमिता जोशी का विवाह 18 फरवरी 1984 को उत्तराखंड के श्रीनगर में हुआ था। विवाह के बाद अमिता बीकानेर आ गईं और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालते हुए जीवनसाथी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलती रहीं।
राजेन्द्र जोशी ने भावुक होकर बताया कि 42 वर्षों के वैवाहिक जीवन में अमिता ने एक पत्नी और मां के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। लंबे समय से वह किडनी की बीमारी से पीड़ित थीं।
परिवार में उनके दो बेटे हैं। बड़े बेटे अमित इंजीनियर हैं, जबकि छोटे बेटे अभिषेक वेटरनरी डॉक्टर हैं।
अमिता की अंतिम यात्रा में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारी-कर्मचारी, रिश्तेदार, पड़ोसी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए। सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी।
यह विदाई सिर्फ एक अंतिम यात्रा नहीं थी, बल्कि 42 वर्षों के उस रिश्ते की भावुक तस्वीर थी, जिसमें साथ निभाने का वादा जीवन की आखिरी सांस के बाद भी कायम रहा।
