
7 सितंबर को होगी अहम सुनवाई, एयरलाइंस के किराए की तय हो सकती है ‘लक्ष्मण रेखा’
नई दिल्ली। त्योहारों, छुट्टियों या अचानक सामने आई किसी इमरजेंसी के दौरान फ्लाइट टिकटों के आसमान छूते दाम से परेशान यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। एयरफेयर में कथित मनमानी और भारी-भरकम अतिरिक्त शुल्क के मामले में सुप्रीम कोर्ट सोमवार, 7 सितंबर को अहम सुनवाई करने जा रहा है।
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ करेगी। सुनवाई पर देशभर के हवाई यात्रियों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है कि एयरलाइंस द्वारा किराया तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और तर्कसंगत व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए।
₹4-5 हजार का टिकट अचानक ₹15-20 हजार क्यों?
आम दिनों में जिस रूट का टिकट करीब ₹4,000 से ₹5,000 में मिल जाता है, वही टिकट दिवाली, छठ, गर्मी की छुट्टियों या किसी अन्य पीक सीजन में कई गुना महंगा होकर ₹15,000 से ₹20,000 या उससे भी अधिक पहुंच जाता है।
यात्रियों का आरोप है कि मांग बढ़ते ही टिकटों के दाम तेजी से बढ़ जाते हैं और कई मामलों में अलग-अलग तरह के शुल्क जुड़ने से अंतिम किराया और भी बढ़ जाता है।
इसी व्यवस्था को चुनौती देते हुए सोशल वर्कर एस. लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
याचिका में क्या मांग?
याचिकाकर्ता का आरोप है कि निजी एयरलाइंस यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रही हैं और मौजूदा नियामकीय व्यवस्था यात्रियों को पर्याप्त राहत देने में प्रभावी साबित नहीं हो रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने दलील दी कि एयरफेयर में पारदर्शिता और यात्रियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है।
याचिका में एविएशन सेक्टर के लिए एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटर बनाने की मांग की गई है, जो किराया निर्धारण में पारदर्शिता सुनिश्चित करे और यात्रियों के हितों की रक्षा कर सके।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी जता चुका है चिंता
एयरफेयर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट पहले भी चिंता जाहिर कर चुका है। इस साल जनवरी में कोर्ट ने त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी को गंभीर विषय माना था और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप की बात कही थी।
इसके बाद 15 मई की सुनवाई में कोर्ट ने एयरफेयर निर्धारित करने के लिए किसी ‘रैशनल सिस्टम’ यानी तर्कसंगत व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया था।
सरकार ने कोर्ट को क्या बताया?
मामले की पिछली सुनवाई 17 अगस्त को हुई थी। उस दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि देश के एविएशन सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नए नियम तैयार किए जा रहे हैं।
सरकार ने नए नियमों का ड्राफ्ट कोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश किया था। केंद्र की ओर से बताया गया कि ड्राफ्ट पर अंतिम दौर की चर्चा चल रही है और इसे करीब तीन सप्ताह में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
अब 7 सितंबर पर टिकी निगाहें
अब सोमवार को होने वाली सुनवाई इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि सवाल सिर्फ टिकट की कीमत का नहीं, बल्कि यात्रियों के हित, किराया निर्धारण में पारदर्शिता और एयरलाइंस की जवाबदेही का भी है।
अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश या व्यवस्था तय करता है, तो इसका सीधा असर देश में हवाई यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों पर पड़ सकता है।
सवाल बड़ा है—क्या त्योहारों और इमरजेंसी के समय यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर एयरफेयर बढ़ाने पर अब लगेगी लगाम?
इसका जवाब 7 सितंबर की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से मिलने की उम्मीद है।
