2023 के विधानसभा चुनाव में जीत को चुनौती देने वाली याचिका पर जारी रहेगी सुनवाई, पूर्व सीएम को हाई कोर्ट में सभी दलीलें रखने की छूट
नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें 2023 के विधानसभा चुनाव में भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को शुरुआती स्तर पर खारिज करने की मांग स्वीकार नहीं की गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे, ने भूपेश बघेल की याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि वे चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के समक्ष अपनी सभी आपत्तियां और कानूनी दलीलें रख सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी चुनौती खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि वे ट्रायल के दौरान अपने सभी मुद्दे उठाने के अधिकार से वंचित हो गए हैं।
विजय बघेल ने दी थी चुनाव को चुनौती
यह मामला भाजपा नेता विजय बघेल की ओर से दायर चुनाव याचिका से जुड़ा है। इसमें 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट में भूपेश बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील रखी कि चुनाव याचिका कानूनन विचार योग्य नहीं है। उनकी ओर से यह तर्क भी दिया गया कि चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद कथित गतिविधि को लेकर लगाए गए आरोप अपने आप में चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं बनते।
हाई कोर्ट में जारी रह सकती है सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल चुनाव याचिका की सुनवाई रोकने या उसे शुरुआती स्तर पर समाप्त करने का रास्ता नहीं अपनाया। अदालत ने माना कि भूपेश बघेल के पास अपनी ओर से रखने के लिए कानूनी आधार हैं और उन्हें चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान इन दलीलों को उठाने की स्वतंत्रता रहेगी।
इस फैसले के बाद पाटन विधानसभा चुनाव से जुड़ा विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में जारी रहेगी।
