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छत्तीसगढ़:- जंगल में मिला भालू का शव, चारों नाखून गायब! डॉग स्क्वॉड ने खोला राज, दो आरोपी गिरफ्तार


​बीमारी से हुई थी भालू की मौत, शव मिलने के बाद आरोपियों ने निकाले नाखून; वन विभाग ने चारों नाखून किए बरामद


पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा-मरवाही वन क्षेत्र में वन्यजीव अपराध का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जंगल में मृत मिले एक भालू के चारों नाखून गायब पाए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने जांच शुरू की और डॉग स्क्वॉड की मदद से दो संदिग्धों तक पहुंचकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से भालू के चारों गायब नाखून भी बरामद कर लिए गए हैं।


भालू का शव मिला तो गायब थे चारों नाखून


जानकारी के अनुसार, वन क्षेत्र में भालू का शव मिलने की सूचना के बाद वन अमला मौके पर पहुंचा। जांच के दौरान पता चला कि भालू के चारों नाखून निकाल लिए गए थे। इसके बाद वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज की और मौके पर डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया।


खोजी कुत्ते की मदद से जांच टीम आरोपियों तक पहुंची। पूछताछ में दोनों आरोपियों ने मृत भालू के नाखून निकालने की बात स्वीकार की, जिसके बाद उनके पास से चारों नाखून बरामद कर लिए गए।


पोस्टमार्टम में खुलासा—संक्रमण से हुई थी मौत


भालू के पोस्टमार्टम में सामने आया कि उसकी मौत फेफड़ों में संक्रमण के कारण हुई थी। यानी भालू की मौत शिकार या किसी हमले से नहीं हुई थी। हालांकि, मृत वन्यजीव के शरीर से उसके अंग निकालना भी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है।


पोस्टमार्टम के बाद डीएफओ कुमार निशांत की मौजूदगी में भालू का पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया।


अंधविश्वास बना वन्यजीव अपराध की वजह


वन अधिकारियों के मुताबिक, भालू के नाखून, दांत और शरीर के अन्य अंगों को लेकर समाज में कई तरह की अंधविश्वासी मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोग इन्हें ताबीज के रूप में रखने या पहनने से लाभ मिलने की गलत धारणा रखते हैं। इसी अंधविश्वास के कारण वन्यजीवों के अंगों की अवैध मांग और तस्करी को बढ़ावा मिलता है।


अनुसूची-1 का संरक्षित वन्यजीव है भालू


अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भालू अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव है। इसके किसी भी अंग को रखना, खरीदना या बेचना कानूनन अपराध है। आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऐसे मामलों में तीन से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।


वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि अंधविश्वास के चक्कर में वन्यजीवों के अंगों की खरीद-फरोख्त न करें और जंगल में वन्यजीवों से जुड़ी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल वन विभाग को दें।

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