रैंप वॉक के वायरल वीडियो से मिली पहचान, अब ऑडिशन के बाद 15 दिन की एक्टिंग वर्कशॉप में लेंगी प्रशिक्षण
रायपुर/बस्तर। बस्तर के जंगलों में कभी हथियार उठाने वाली 9 पूर्व महिला नक्सली अब नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। मुख्यधारा में लौट चुकी इन महिलाओं को छत्तीसगढ़ की नक्सली हिंसा पर आधारित प्रस्तावित हिंदी फिल्म में अभिनय का मौका मिल सकता है। फिल्म में काम करने से पहले उनका औपचारिक ऑडिशन होगा और चयनित महिलाओं को अभिनय का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित फिल्म अविभाजित मध्य प्रदेश के बस्तर में वर्ष 1994 में हुई एक वास्तविक और संवेदनशील घटना पर आधारित होगी। फिल्म निर्माता कहानी को वास्तविक परिवेश के करीब रखने के लिए बस्तर की स्थानीय पृष्ठभूमि और यहां की परिस्थितियों को प्रमुखता देना चाहते हैं।
रैंप वॉक से फिल्म तक पहुंचा सफर
इन पूर्व महिला नक्सलियों ने हाल ही में रायपुर में आयोजित एक शासकीय कार्यक्रम में रैंप वॉक कर सुर्खियां बटोरी थीं। आत्मविश्वास के साथ रैंप पर उतरने के उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसी के बाद फिल्म निर्माताओं का ध्यान उनकी ओर गया।
सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में नई जिंदगी की शुरुआत कर रहीं सुशीला, आंदे भीमे, कुंजाम हिडमे, माइकम महिमा, नंदिनी, डोडी रामे, जोगी वेट्टी और पोडियम राजे सहित 9 महिलाओं को फिल्म से जोड़ने की तैयारी है।
फिल्म में चयन के लिए पहले ऑडिशन लिया जाएगा। इसके बाद चयनित महिलाओं के लिए करीब 15 दिनों की विशेष एक्टिंग वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। इसमें उन्हें कैमरे के सामने अभिनय, संवाद अदायगी और फिल्म शूटिंग से जुड़ी बुनियादी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नवंबर-दिसंबर में बस्तर में शूटिंग की तैयारी
जानकारी के मुताबिक फिल्म की अधिकांश शूटिंग बस्तर के घने जंगलों और दक्षिण बस्तर के इलाकों में नवंबर और दिसंबर के दौरान किए जाने की योजना है। फिल्म निर्माताओं का उद्देश्य स्थानीय परिवेश और वास्तविक लोकेशन के जरिए कहानी को अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
सीएम साय बोले- बस्तर में प्रतिभाओं की कमी नहीं
इस पहल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही मंच और अवसर देने की है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, बस्तर में शांति की दिशा में हो रहे प्रयासों के बीच अब यहां की प्रतिभाओं को देश और दुनिया के सामने अपनी पहचान बनाने के अवसर मिल रहे हैं।
बंदूक से कैमरे तक का यह सफर इन महिलाओं के लिए न सिर्फ एक नई भूमिका की शुरुआत है, बल्कि पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी की कहानी को एक अलग मंच मिलने का संकेत भी है।
