डिपॉजिट-13 के विरोध में 12 से ज्यादा पंचायतों के ग्रामीण एकजुट, मनीष कुंजाम और सोनी सोढ़ी भी पहुंचे
तमोड़ी। जिस इलाके के पहाड़ों से लौह अयस्क निकालने की तैयारी चल रही है, उसी इलाके का तमोड़ी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव तक पहुंचने वाली सड़क अधूरी और निर्माणाधीन है, जबकि गांव के भीतर भी पक्की सड़क का अभाव है। बिजली की सुविधा नहीं है और रोजमर्रा की जरूरत का सामान खरीदने के लिए ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
इन्हीं परिस्थितियों के बीच तमोड़ी में डिपॉजिट-13 के विरोध और आगे की रणनीति को लेकर 12 से अधिक ग्राम पंचायतों के ग्रामीण, सरपंच और जनप्रतिनिधि एकत्र हुए। आदिवासी नेता मनीष कुंजाम और सोनी सोढ़ी भी ग्रामीणों के बीच पहुंचे। इस दौरान आदिवासी समाज और स्थानीय राजनीतिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों ने भी ग्रामीणों को संबोधित किया।
ग्रामीणों का सवाल—सुविधा नहीं तो पहाड़ क्यों दें?
बैठक में ग्रामीणों की नाराजगी खुलकर सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। गांव में जरूरत की छोटी-छोटी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अब उनके पहाड़ में मौजूद खनिज को लेकर गतिविधियां तेज हो रही हैं।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब गांव के विकास की बात आती है तो सड़क और बिजली के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन पहाड़ के खनिज की बात आते ही प्रक्रिया तेजी से आगे कैसे बढ़ जाती है?
नंदराज पहाड़ सिर्फ खनिज नहीं, आस्था का केंद्र
ग्रामीणों ने नंदराज पहाड़ को अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आस्था से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि पहाड़ उनके देवी-देवताओं की आस्था से जुड़ा है और उनके लिए जल, जंगल, जमीन तथा आदिवासी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
बैठक में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे नंदराज पहाड़ देने के पक्ष में नहीं हैं।
12 से ज्यादा पंचायतों के ग्रामीण जुटे
तमोड़ी में आयोजित बैठक में विभिन्न पंचायतों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और सरपंच पहुंचे। डिपॉजिट-13 के विरोध को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। नेताओं ने ग्रामीणों से एकजुट रहने और अपनी मांगों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया।
बैठक के दौरान गांव की स्वास्थ्य और पोषण संबंधी स्थिति की तस्वीर भी सामने आई। ग्रामीण परिवारों के साथ मौजूद कुछ बच्चे बेहद कमजोर नजर आए। वहीं, एक बच्ची की एक आंख में गंभीर समस्या भी दिखाई दी। हालांकि बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति की चिकित्सकीय पुष्टि नहीं हुई है।
सैंपल जांच के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
डिपॉजिट-13 से जुड़े लौह अयस्क के सैंपल जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी के बीच तमोड़ी में हुई यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ग्रामीणों के विरोध के बीच अब परियोजना से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर भी नजर रहेगी।
तमोड़ी के ग्रामीणों का सवाल अब सिर्फ डिपॉजिट-13 तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास के मॉडल और स्थानीय लोगों के अधिकारों से भी जुड़ता दिखाई दे रहा है।
सवाल सीधा है—जिस इलाके के पहाड़ से खनिज निकालने की तैयारी है, क्या उसी इलाके के गांवों को पहले सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी?
तमोड़ी के ग्रामीण फिलहाल इसी सवाल के साथ एकजुट खड़े हैं।
