ठेकेदार का आरोप—5 लाख रुपये कमीशन से इनकार पर पालिका उपाध्यक्ष ने कराई गोदाम पर बुलडोजर कार्रवाई।
बचेली, दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा।
बचेली नगर पालिका क्षेत्र में करीब 90 लाख रुपये के टेंडर से जुड़े निर्माणाधीन अस्थायी गोदाम को बुलडोजर से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। ठेकेदार डीके वर्मा ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि गोदाम का निर्माण पालिका सीएमओ की जानकारी में शुरू हुआ था। 14 अक्टूबर को इसे हटाने का नोटिस दिया गया, जिसके बाद पालिका की टीम ने कार्रवाई की।
वर्मा का दावा है कि 90 लाख रुपये के टेंडर में तीन लोग शामिल थे, जिनमें पालिका उपाध्यक्ष सतीश प्रेमचंदानी स्वयं भी पार्टनर थे। उनके अनुसार, उपाध्यक्ष ने 30 लाख के काम के बदले 5 लाख रुपये कमीशन मांगा था। वर्मा ने मांग पूरी करने से इनकार करते हुए कहा था कि वह अपना काम खुद करे वे कमीशन नहीं दे पाएंगे। डीके वर्मा ने मटेरियल का भी पैसा बकाया होने की बात भी मीडिया से कही है। उनका आरोप है कि इसके बाद नाराज होकर उपाध्यक्ष ने कार्रवाई कराई।
90 लाख रुपये के टेंडर से जुड़ा था निर्माण
वर्ष 2025 में ट्रांसपोर्ट नगर से संबंधित करीब 90 लाख रुपये का टेंडर डीके वर्मा,नरसिम्हा रेड्डी सहित सतीश प्रेमचंदानी को मिला था। सामग्री रखने के लिए अस्थायी गोदाम बनाया जा रहा था। ठेकेदार के अनुसार, काम पूरा होने के बाद गोदाम हटाकर जमीन पालिका को सौंपनी थी और इस संबंध में पालिका सीएमओ को लिखित पत्र भी दिया गया था। असल में उपरोक्त इलाका लोहाचोरो की मनपसंद जगह है पहले भी काम के दौरान समान चोरी हुआ है जिसकी रिपोर्ट बचेली थाने में की गई थी दोबारा चोरी ना हो इसी भय से ठेकेदार द्वारा सीमेंट छड सहित अन्य सामग्री के लिए ईंटों की कच्ची जोड़ाई करवा के ऊपर शीट पाइप लगाने की तैयारी की जा रही थी। दीवारों में ना तो प्लास्टर किया गया ना ही कोई कंक्रीट किया गया था निर्माण पूर्णतः अस्थाई था।
नोटिस और कार्रवाई पर सवाल
ठेकेदार पक्ष के अनुसार, 14 अक्टूबर को गोदाम हटाने का नोटिस दिया गया था। उनका दावा है कि समाधान के लिए बातचीत चल रही थी, लेकिन इससे पहले ही पालिका की टीम बुलडोजर लेकर पहुंच गई। ठेकेदार ने पर्याप्त समय और सुनवाई का अवसर नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है।
ठेकेदार संघ ने भी नोटिस और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। मलबे और निर्माण सामग्री के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अतिक्रमण कार्रवाई में समानता की मांग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कमजोर वर्ग के निर्माणों पर तेजी से कार्रवाई होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के कथित अवैध निर्माणों पर कार्रवाई नहीं होती है। ट्रांसपोर्ट नगर की घटना के बाद मांग उठी है कि अतिक्रमण हटाने के नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जाएं।
निष्पक्ष जांच की मांग
मामला केवल अस्थायी गोदाम हटाने तक सीमित नहीं है। इसमें 90 लाख रुपये का टेंडर, पालिका की कथित सहमति, सीएमओ की जानकारी, 14 अक्टूबर का नोटिस, कार्रवाई की प्रक्रिया और 5 लाख रुपये कमीशन मांगने का आरोप शामिल है।
निजी दुश्मनी या वैधानिक कार्यवाही ?
अतिक्रमण हटवाने की कार्यवाही राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा की जाती है जिसमें एसडीएम, तहसीलदार सहित पालिका के अधिकारियों की टीम ही मौके पर रहकर कार्यवाही करते है परन्तु इस पूरी कार्यवाही को देखा जाए तो पालिका उपाध्यक्ष पंक्ति में सबसे आगे दिखाई देते है समाचार पत्रों न्यूज चैनलों में भी वही इस कथित अतिक्रमण को लेकर बयान देते नजर आ रहे है इतना ही नहीं निर्माण तोड़ने वाली वीडियो में भी उपाध्यक्ष पूरे पावर से निर्माण तुड़वा रहे डायरेक्शन दे रहे है। इसी वजह से कार्यवाही में निजी दुश्मनी दिखाई पड़ती है मानो ठेकेदार को कोई संदेश दिया जा रहा हो।
फिलहाल आरोपों में कितनी सच्चाई है और कार्यवाही नियमतः हुई है या नहीं जांच की आवश्यकता है।
