वार्ड बॉय की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम लेने का आरोप, दस्तावेज और हस्ताक्षर भी लिए; पुलिस ने दर्ज किया मामला।
बलौदाबाजार। नौकरी दिलाने के नाम पर कथित ठगी के आरोपों से घिरे भाजपा से निष्कासित पूर्व जिला महामंत्री कृष्ण अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बलौदाबाजार सिटी कोतवाली पुलिस ने दोनों के खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर 6 लाख रुपये लेने और कथित धोखाधड़ी के आरोप में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत ग्राम ओड़ान निवासी पूर्व सरपंच जीवन लाल कमल और उनके साथियों ने की है।
जिला अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी का दिया भरोसा
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, कृष्ण अवस्थी ने अपने राजनीतिक प्रभाव और अधिकारियों से संपर्क होने की बात कहते हुए जिला अस्पताल में वार्ड बॉय की नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया था। आरोप है कि इसी भरोसे में अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए रकम किस्तों में ली गई।
शिकायत में उल्लेख है कि पहली रकम 14 सितंबर 2025 को और शेष राशि 16 फरवरी 2026 को दी गई। आरोप है कि पैसे लेने के बाद भी नौकरी नहीं लगी। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं को नियुक्ति और ज्वाइनिंग लेटर जल्द मिलने का भरोसा दिया जाता रहा।
बेटे प्रणव पर दस्तावेज लेने का आरोप
शिकायत के अनुसार, कृष्ण अवस्थी के कहने पर अभ्यर्थियों की मुलाकात उनके बेटे प्रणव अवस्थी से हुई। आरोप है कि प्रणव ने नौकरी के लिए अंकसूची, बैंक पासबुक, फोटो समेत अन्य दस्तावेज लिए और अभ्यर्थियों के हस्ताक्षर भी करवाए।
लंबे समय तक नौकरी नहीं लगने के बाद शिकायतकर्ताओं ने पुलिस का रुख किया।
इन अभ्यर्थियों के नाम भी शिकायत में
शिकायत के मुताबिक, नौकरी लगाने के लिए जिन अभ्यर्थियों के नाम सामने आए हैं, उनमें जीवन लाल कमल के बेटे भास्कर कमल, श्रीराम कत्रोज के बेटे चैतन्य कत्रोजे, डोमार कत्रोज के बेटे गौरव और हेमंत कत्रोज, तथा सोहन कत्रोज के बेटे दिलीश्वर और योगेश कत्रोजे शामिल हैं।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन सभी से संबंधित रकम मिलाकर कुल 6 लाख रुपये लिए गए।
एक के बाद एक सामने आ रहे शिकायतकर्ता
कृष्ण अवस्थी और उनके बेटे प्रणव अवस्थी के खिलाफ नौकरी लगाने के नाम पर कथित ठगी के आरोपों को लेकर अब शिकायतें लगातार सामने आने लगी हैं। इस शिकायत को मामले की तीसरी FIR बताया जा रहा है।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है। FIR में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
