
उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा जांच का दायरा, अभ्यर्थियों से कारोबारी और रिसॉर्ट संचालकों तक पहुंची ED की पड़ताल
रायपुर, 05 सितंबर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा कदम उठाते हुए करीब 30 लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। ईडी की जांच अब कथित ‘कैश सिंडिकेट’, मनी लॉन्ड्रिंग और करोड़ों रुपये के मनी ट्रेल पर केंद्रित हो गई है।
मुख्य आरोपित और कथित बिचौलिए उत्कर्ष चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने अपना दायरा और बढ़ा दिया है। ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने विवादित अभ्यर्थियों के अलावा स्थानीय कारोबारियों, प्रॉपर्टी डीलरों, एनजीओ, रिसॉर्ट संचालकों और एक बड़ी कंपनी से जुड़े लोगों को भी पूछताछ के लिए बुलाया है।
3 करोड़ से ज्यादा की वसूली का आरोप
ईडी की जांच के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर पर CGPSC-2021 परीक्षा में कथित तौर पर पेपर लीक कराने और परीक्षा पास कराने का दावा कर अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी वसूलने का आरोप है।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस रकम में से करीब 2.80 करोड़ रुपये महासमुंद के डॉ. अनिल चंद्राकर तक पहुंचाए गए। ईडी के मुताबिक अनिल चंद्राकर कथित कैश सिंडिकेट में पैसों के लेन-देन की महत्वपूर्ण कड़ी है और वह उत्कर्ष चंद्राकर का करीबी सहयोगी बताया गया है।
‘कैश’ को सफेद करने के रास्तों की तलाश
ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर वसूली गई करोड़ों रुपये की नकदी को किस तरह बैंकिंग चैनल, फर्जी कंपनियों, सीएसआर फंड या अन्य माध्यमों के जरिए वैध दिखाने अथवा ट्रांसफर करने की कोशिश की गई।
एजेंसी की नजर एनजीओ और रिसॉर्ट संचालकों से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी है। आशंका जताई जा रही है कि एक बड़ी कंपनी के सीएसआर फंड का कथित तौर पर रिश्वत की रकम के लिए इस्तेमाल किया गया हो सकता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
1 सितंबर को पांच ठिकानों पर पड़ा था छापा
इस मामले में ईडी ने 1 सितंबर को रायपुर, दुर्ग, धमतरी और जशपुर में पांच ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान डिजिटल डिवाइस, वित्तीय रिकॉर्ड और कथित बेनामी संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए थे।
इसके बाद उत्कर्ष चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया। 5 सितंबर तक वह ईडी की कस्टोडियल रिमांड पर है। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर अब जांच का दायरा करीब 30 लोगों तक पहुंच गया है।
कौन है मनी ट्रेल की अहम कड़ी?
ईडी के अनुसार अनिल चंद्राकर इस पूरे मामले में पैसों के कथित लेन-देन की अहम कड़ी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अभ्यर्थियों से कथित तौर पर जुटाई गई रकम कहां से आई, किन लोगों तक पहुंची और इसे किस माध्यम से आगे ट्रांसफर या इस्तेमाल किया गया।
फिलहाल डॉ. विकास चंद्राकर और अनिल चंद्राकर से पूछताछ जारी है। ईडी कथित कैश सिंडिकेट में शामिल लोगों, रकम के स्रोत, वितरण और संभावित लाभार्थियों के बीच संबंधों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कथित कैश सिंडिकेट से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
