
13 साल बाद न्याय की दिशा में बड़ा कदम, दिग्गज नेताओं से लेकर सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दी थी शहादत
सुकमा। छत्तीसगढ़ के इतिहास के सबसे भयावह नक्सली हमलों में शामिल झीरम घाटी हमले से जुड़े मामले में NIA कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। वर्षों से चल रही जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को मामले में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव माना जा रहा है। अब दोषियों को सुनाई जाने वाली सजा पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
झीरम घाटी हमले ने वर्ष 2013 में पूरे देश को झकझोर दिया था। कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर घात लगाकर किए गए इस नक्सली हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई थी। इस हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव छोड़ा।
इन 10 आरोपियों को ठहराया गया दोषी
NIA कोर्ट के फैसले के अनुसार मामले में इन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है—
1. प्रमिला मोडियम
2. चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
3. सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
4. मुक्का मांडवी
5. कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
6. आयता मरकाम
7. मदकामी देवा
8. जोगा मदकामी
9. बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
10. महादेव नाग
कई गंभीर धाराओं में दर्ज था मामला
केस रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इनमें धारा 147, 148, 149, 341, 121, 121A, 122, 307, 302, 427, 396, 397 और 120B सहित अन्य धाराएं शामिल थीं।
इसके अलावा Arms Act की धारा 25 और 27, Explosive Substances Act की धारा 3, 4 और 5 तथा UAPA की धारा 16, 18, 20, 38(2), 39(2) और 40(2) के तहत भी कार्रवाई की गई थी।
2013 में दर्ज हुई थी FIR
केस रिकॉर्ड के अनुसार झीरम घाटी की घटना के बाद इस मामले में NIA/Delhi में FIR संख्या 06/2013 दर्ज की गई थी। इसके बाद मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चली।
अब अदालत द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद मामले में आगे की प्रक्रिया के तहत सजा का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। उपलब्ध विवरण में प्रत्येक दोषी को किस धारा के तहत कितनी अवधि की सजा सुनाई गई है, इसकी विस्तृत जानकारी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सजा की अवधि को लेकर किसी तरह का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
झीरम में शहीद हुए थे छत्तीसगढ़ के कई दिग्गज नेता
झीरम घाटी हमला केवल एक नक्सली वारदात नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसकी टीस आज भी लोगों के मन में है।
इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल की हत्या कर दी गई थी। बस्तर के कद्दावर आदिवासी नेता और पूर्व गृह मंत्री महेंद्र कर्मा भी नक्सलियों के हमले में शहीद हुए थे।
पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे। उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन 11 जून 2013 को उनका निधन हो गया।
इसके अलावा पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार तथा नंद कुमार पटेल के पुत्र दिनेश पटेल की भी इस हमले में जान चली गई थी।
सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी दी थी शहादत
झीरम घाटी की घटना में केवल राजनीतिक नेतृत्व ही निशाने पर नहीं था। हमले में सुरक्षाकर्मियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं समेत कई लोगों की जान गई थी। अचानक हुए घातक हमले ने पूरे प्रदेश को स्तब्ध कर दिया था।
हमले के बाद लंबे समय तक पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा करते रहे। ऐसे में NIA कोर्ट द्वारा 10 आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के फैसले को पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
13 साल बाद अदालत के फैसले से फिर चर्चा में झीरम
झीरम घाटी हमले के बाद से ही इस घटना की जांच, आरोपियों की भूमिका और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। अब अदालत के फैसले ने एक बार फिर इस मामले को प्रदेश की राजनीति और जनचर्चा के केंद्र में ला दिया है।
10 आरोपियों के दोषी करार दिए जाने के बाद अब अगली नजर अदालत द्वारा सुनाई जाने वाली सजा पर है। पीड़ित परिवारों और प्रदेशवासियों के लिए यह फैसला लंबे न्यायिक इंतजार के बाद आया एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।
