1982 के बाद मैराथन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने सेना के एथलीट सावन बरवाल, एनएमडीसी ने तैयारी में दिया सहयोग
नई दिल्ली। देश की नवरत्न खनन कंपनी एनएमडीसी के सहयोग से भारतीय एथलीट श्री सावन बरवाल ने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर शानदार उपलब्धि हासिल की है। हिमाचल प्रदेश के 28 वर्षीय सेना के एथलीट सावन बरवाल ने एशियन गेम्स मैराथन में 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।
इस उपलब्धि के साथ सावन बरवाल 1982 के बाद एशियन गेम्स मैराथन में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। इससे पहले 1982 में नई दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स में श्री होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने मैराथन में कांस्य पदक जीता था।
एनएमडीसी ने बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की सावन बरवाल की तैयारी के दौरान उन्हें सहयोग प्रदान किया। कंपनी के अनुसार, उनकी यह उपलब्धि खेल प्रतिभाओं की पहचान, उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने की दिशा में एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
एनएमडीसी लंबे समय से देश में खेलों के विकास और उभरती प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग करता रहा है। कंपनी कबड्डी, बॉक्सिंग, क्रिकेट और फुटबॉल सहित कई खेलों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को व्यक्तिगत प्रायोजन और सहयोग प्रदान करती है। इसके अलावा एनएमडीसी कई वर्षों से हैदराबाद मैराथन का टाइटल स्पॉन्सर भी रहा है।
प्रधानमंत्री के ‘फिट इंडिया’ विजन के अनुरूप एनएमडीसी युवाओं में शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य और खेल भावना को बढ़ावा देने के लिए गेमिफाइड वॉकाथॉन, विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और योग कार्यक्रमों का आयोजन एवं समर्थन करता है।
बस्तर के 170 एथलीटों को भी मिला एनएमडीसी का सहयोग
एनएमडीसी की खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की पहल का विस्तार बस्तर जैसे क्षेत्रों तक भी है। हाल ही में संपन्न एनएमडीसी हैदराबाद मैराथन में कंपनी ने बस्तर के 170 एथलीटों को प्रायोजित किया था। इनमें बस्तर के श्री फुलधर नेताम ने ओपन कैटेगरी में प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
सावन बरवाल की एशियन गेम्स मैराथन में ऐतिहासिक रजत पदक जीत और फुलधर नेताम जैसे उभरते खिलाड़ियों की सफलता एनएमडीसी के खेल प्रोत्साहन अभियान को नई पहचान देती है। कंपनी का उद्देश्य देशभर की प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें अवसर, संसाधन और सहयोग उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर सकें।
