पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में आया फैसला, प्रधान आरक्षक ने कहा— न्याय की लड़ाई में साथ देने वालों और षड्यंत्र करने वालों का भी आभार
सूरजपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में पुलिस प्रधान आरक्षक की पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। फास्ट ट्रैक अदालत ने गुरुवार को मामले के चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन आरोपियों को मृत्युदंड और एक अन्य आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद पुलिस लाइन में दीये जलाए गए और आतिशबाजी की गई। वहीं, पीड़ित परिवार की ओर से प्रधान आरक्षक की सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने न्याय की लड़ाई में साथ देने वालों के साथ-साथ अपने खिलाफ षड्यंत्र और चालबाजी करने वालों का भी आभार जताया।
तीन दोषियों को मृत्युदंड, एक को उम्रकैद
सरकारी वकील सुरेश शर्मा के अनुसार, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वारियाल ने मामले के चारों आरोपियों को दोषी करार दिया। अदालत ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मृत्युदंड की सजा सुनाई, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी।
इस फैसले के बाद मामले में न्याय की मांग कर रहे परिवार और पुलिसकर्मियों के बीच राहत एवं संतोष का माहौल देखने को मिला।
पुलिस लाइन में जले दीये, आतिशबाजी कर जताई खुशी
अदालत के फैसले के बाद पुलिस लाइन में पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों ने दीये जलाकर खुशी जाहिर की। इस दौरान पटाखे फोड़े गए और आतिशबाजी भी हुई। दोहरे हत्याकांड में दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस परिवारों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा।
प्रधान आरक्षक की भावुक पोस्ट— “न्याय जिंदा है”
अदालत के फैसले के बाद पीड़ित प्रधान आरक्षक ने सोशल मीडिया पर अपनी मासूम बेटी की वर्दी पहने तस्वीर साझा की। पोस्ट में उन्होंने लंबे समय से झेल रहे दुख और न्याय के लिए किए गए संघर्ष का जिक्र किया।
उन्होंने लिखा कि असीम वेदना और लंबे दुख के बाद अंधेरे में न्याय की एक लौ ने नया संदेश दिया है। अदालत के फैसले ने साबित किया है कि न्याय जिंदा है और ऐसे अपराधों के लिए कानून में सजा का प्रावधान है।
प्रधान आरक्षक ने न्याय की लड़ाई में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से साथ देने वाले सभी लोगों का आभार जताया। साथ ही, उन्होंने उन लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन पर उन्होंने मुश्किल समय में अपने खिलाफ षड्यंत्र और चालबाजी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आगे कहा कि अदालत के फैसले को उसके अंतिम अंजाम तक पहुंचाने के लिए अभी लंबी लड़ाई लड़नी है। उन्हें विश्वास है कि आगे भी जरूरत पड़ने पर सहयोगी उनके साथ खड़े रहेंगे।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2024 को सूरजपुर शहर में पुलिस प्रधान आरक्षक की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुलदीप साहू पर मुख्य आरोपी होने का आरोप था। पुलिस के अनुसार, चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा और फूल सिंह ने भी कथित तौर पर इस अपराध में उसकी मदद की थी।
अदालत में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार, महिला और उनकी नाबालिग बेटी के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। महिला के शरीर पर चोट के 33 निशान और बच्ची के शरीर पर 28 निशान पाए गए थे।
इस जघन्य दोहरे हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। अब अदालत द्वारा तीन आरोपियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद मामला एक महत्वपूर्ण न्यायिक पड़ाव पर पहुंचा है।
नोट: मृत्युदंड की सजा के मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अपील की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी।
