कांशीराम साहब के महापरिनिर्वाण दिवस पर सामाजिक न्याय का संकल्प; राष्ट्रपति के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच, कानूनी समीक्षा और आदिवासी बंदियों को फांसी की सजा के फैसले पर रोक लगाने रखी मांग।
जगदलपुर, बस्तर। बहुजन नायक एवं सामाजिक परिवर्तन के प्रणेता मान्यवर साहब कांशीराम जी के महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिला बस्तर की ओर से जगदलपुर में संकल्प रैली का आयोजन किया गया। रैली के माध्यम से झीरम घाटी कांड से जुड़े मामले में 10 आदिवासी व्यक्तियों को न्याय दिलाने, कानूनी प्रक्रिया की समीक्षा कराने और बस्तर में शांति एवं सामाजिक न्याय स्थापित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
रैली के दौरान आयोजकों ने संबंधित व्यक्तियों को सुनाई गई फांसी की सजा पर रोक लगाने, मामले के विभिन्न पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराने तथा आदिवासी बंदियों को संवैधानिक अधिकारों के अनुरूप न्याय दिलाने की मांग की। इन मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।
झीरम मामले में न्यायिक समीक्षा की मांग, फांसी पर रोक लगाने की अपील
भीम आर्मी ने झीरम घाटी घटना से जुड़े मामले में संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों को सुनाई गई सजा और उससे संबंधित कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा की मांग उठाई। संगठन की ओर से मांग की गई कि मामले के सभी पहलुओं, कथित षड्यंत्र और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में संबंधित व्यक्तियों की फांसी पर तत्काल रोक लगाने तथा आत्मसमर्पण कर चुके प्रमुख आरोपियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग शामिल रही। संगठन ने कहा कि न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्षता और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए।
एनआईए की विशेष अदालत द्वारा फांसी की सजा पर रोक लगाए जाने संबंधी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए अदालत के आदेश की तारीख और सटीक विवरण की पुष्टि होने तक इस संबंध में अंतिम न्यायिक निर्णय का दावा नहीं किया जा रहा है।
सात सूत्रीय ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
भीम आर्मी भारत एकता मिशन की ओर से राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में सात प्रमुख मांगें रखी गईं—
- संबंधित 10 आदिवासी व्यक्तियों की फांसी पर तत्काल रोक लगाने और न्यायसंगत कानूनी प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग।
- आत्मसमर्पण कर चुके प्रमुख आरोपियों की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच।
- झीरम घाटी घटना से जुड़े कथित षड्यंत्र और अन्य पहलुओं की निष्पक्ष जांच।
- संबंधित मामले में सुनाई गई सजा और न्यायिक प्रक्रिया की विधिसम्मत उच्चस्तरीय समीक्षा।
- बस्तर की जेलों में बंद विचाराधीन आदिवासी बंदियों के मामलों की समयबद्ध समीक्षा और पात्र बंदियों को कानून के अनुसार राहत।
- एमबीएम से जुड़े बंदियों के मामलों की शीघ्र समीक्षा और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई।
- बस्तर में स्थायी शांति के लिए न्याय, संवाद, मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित नीति अपनाने की मांग।
कांशीराम साहब के विचारों को याद कर लिया सामाजिक न्याय का संकल्प
कार्यक्रम में मान्यवर कांशीराम साहब के सामाजिक परिवर्तन, समानता और बहुजन समाज के अधिकारों से जुड़े विचारों को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के वंचित और आदिवासी वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाना आवश्यक है।
संकल्प रैली में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से आए भीम आर्मी के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस दौरान सामाजिक न्याय, समानता, मानवाधिकारों तथा संविधान में निहित मूल्यों की रक्षा का संदेश दिया गया।
प्रदेश पदाधिकारियों सहित कार्यकर्ताओं की रही उपस्थिति
रैली में भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश आजाद, प्रदेश उपाध्यक्ष सुयाल नाग सहित बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के जिला अध्यक्ष, पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के माध्यम से संगठन ने न्याय और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
न्याय, संवाद और शांति पर जोर
भीम आर्मी की इस संकल्प रैली के माध्यम से बस्तर में न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित करने की मांग सामने आई। आयोजकों ने जोर दिया कि आदिवासी समुदाय से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया और कानून के तहत सभी को समान अवसर मिलना चाहिए।
संकल्प रैली का संदेश स्पष्ट रहा—सामाजिक न्याय, मानवाधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक प्रयास जारी रहने चाहिए।
